Thursday, 16 June 2016

JANSAMPARK NEWS 15-6-16

वर्तमान समय में मृदा परीक्षण कास्तकारी की मूल आवश्यकता 
के.वी.के. सलाहकार समिति की बैठक में कार्ययोजना प्रस्तुत की गई 
बुरहानपुर | 15-जून-2016
 बुधवार को कृषि विज्ञान केन्द्र की सलाहकार समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में केन्द्र द्वारा पिछले छःमाही में विविध क्षेत्रों में किये गये कार्यो का विवरण दिया गया। इसके अलावा कृषि, उद्यानिकी, मुर्गीपालन, पशुपालन व मधुमक्खी पालन को उन्नत बनाने आगामी छः माह की अद्यतन कार्ययोजना का ब्यौरा प्रस्तुत किया। इस दरम्यान केन्द्र द्वारा किये गये कार्यो तथा भावी कार्यक्रम को सभी ने सराहा। 
    केन्द्र के अध्यक्ष श्री हमीद काजी की उपस्थिति में कार्यक्रम समन्वयक डॉ.अजीत सिंह ने पिछली एवं भावी कार्ययोजना को विस्तार से अवगत कराया। उन्होनें बताया कि किसान भाईयों को प्रचार-प्रसार गतिविधियों के माध्यम से जागृत किया गया है। इसमें किसान संगोष्ठी व विभिन्न गतिविधियों से कृषि एवं उद्यानिकी के क्षेत्र में लाभान्वित किया है। वहीं कड़कनाथ मुर्गी पालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस मौके पर ग्वालियर के डॉ. यु.पी.एस.भदोरिया ने कहा कि वर्तमान में मिट्टी परीक्षण द्वारा मिट्टी में पाये जाने वाले पौधों के पौषक तत्वों का प्रबंधन संभव है। इससे किसान सही मात्रा में खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग कर सकते है। फसलों के अधिकतम उत्पादन अर्जित करने एवं बाग लगाने के लिये मिट्टी परीक्षण विशेष रूप से लाभदायक है। कृषि उपसंचालक श्री देवके ने बताया कि जलवायु परिवर्तन एवं बदलते मौसम में खाद्यान्न, ईधन, फल, पशुचारा व इमारती लकड़ी की बढ़ती हुई आवश्यकता को देखते हुए किसान अपने खेतों या मेड़ो पर वन पौधें लगाकर आर्थिक लाभ कमा सकते है। इसमें विभाग द्वारा खमैर, बांस, नीम, महुआ, सागौन, करंज, खैर, अर्जुन, सीताफल पौधें पर अनुदान देने का प्रावधान है। बैठक में के.वी.के.सचिव श्री नूर काजी, डॉ.डी.के.वाणी, सहायक संचालक श्री आर.एन.एस.तोमर, मत्स्य विभाग सहायक संचालक श्री ए.एस.भटनागर, एलडीएम श्री महेश कुमार मित्तल, महिला एवं बाल विकास विभाग से श्रीमती मंजूश्री ठाकुर सहित कृषि विज्ञान केन्द्र वैज्ञानिक और अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक में उपसंचालक आत्मा श्री राजेश चतुर्वेदी ने धारवाड़ पद्धति से अरहर बोवने का सुझाव दिया। वहीं प्रगतिशील कृषकों ने भी कृषि विज्ञान केन्द्र की आगामी कार्ययोजना में अपने अनुभवों को साझा करते हुए सुझाव दिये। किसानों ने कृषि व उद्यानिकी हेतु जलसंरक्षण और संवर्धन पर विशेष जोर दिया। 

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